लखनऊ में महीनों चले सर्च ऑपरेशन में नहीं मिला कोई अवैध बांग्लादेशी, पुलिस ने झुग्गियों सहित कई इलाकों में की सघन जांच; मेयर के दावे पर उठे सवाल
- संवाददाता

- 16 घंटे पहले
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लखनऊ में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश के लिए चलाए गए कई महीनों लंबे सर्च अभियान में पुलिस को अब तक एक भी अवैध बांग्लादेशी नहीं मिला है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के अनुसार शासन के निर्देश पर राजधानी के सभी पांचों जोन में व्यापक सत्यापन और सघन चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस टीमों ने विभिन्न इलाकों, खासकर झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में जाकर लोगों के पहचान पत्र और दस्तावेजों की जांच की।
जांच के दौरान सामने आया कि झुग्गियों में रहने वाले अधिकांश लोग असम से आए हैं और उनके दस्तावेज वैध पाए गए। अब तक किसी भी संदिग्ध या अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी की पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि पुलिस ने अभियान जारी रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार यदि भविष्य में कोई अवैध रूप से रह रहा व्यक्ति मिलता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच ठाकुरगंज क्षेत्र में एटीएस के इनपुट पर एक महिला नरगिस को गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से फर्जी आधार कार्ड बरामद हुए थे। जांच में पता चला कि वह बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आई थी और अलग-अलग नामों से दस्तावेज बनवाए थे। पुलिस ने उसकी मदद करने वाले एक साथी को भी गिरफ्तार किया था।
जनवरी 2025 में लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने शहर में करीब दो लाख संदिग्ध बांग्लादेशी और रोहिंग्या के रहने का दावा किया था। हाल ही में उन्होंने कहा कि मौजूदा सर्च ऑपरेशन की विस्तृत रिपोर्ट उन्हें अभी तक नहीं मिली है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही वह इस मुद्दे पर आगे टिप्पणी करेंगी।
बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए पुलिस ने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया है और खुफिया एजेंसियों की मदद ली जा रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि असम से आए कई लोग लखनऊ में बस गए हैं और स्थानीय पते के आधार पर दस्तावेज बनवा चुके हैं, जिनमें से कई स्थानीय निकाय के मतदाता भी हैं।





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