top of page

राजधानी में अफसरपुत्र की दबंगई: चौकी में घुसकर सिपाही से मारपीट, वर्दी फाड़ी, फिर भी FIR में नाम नहीं

  • लेखक की तस्वीर: संवाददाता
    संवाददाता
  • 12 जून
  • 2 मिनट पठन

ree

लखनऊ | राजधानी में कानून के दोहरे मापदंड का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। 29 मई की रात स्टेडियम पुलिस चौकी पर तैनात सिपाही अर्जुन चौरसिया के साथ मारपीट की गई, वर्दी फाड़ी गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और यह सब कथित तौर पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बेटे और उसके तीन साथियों ने किया। बावजूद इसके, FIR में अफसरपुत्र का नाम नहीं है।

घटना का विवरण:

FIR के मुताबिक, 29 मई की रात एक सफेद इनोवा कार में सवार चार युवक स्टेडियम पुलिस चौकी के पास आपस में झगड़ रहे थे। जब सिपाही अर्जुन चौरसिया ने उन्हें टोका, तो वे भड़क गए। आरोप है कि चारों युवक सिपाही को चौकी के भीतर घसीट लाए, गालियां दीं, मारपीट की और वर्दी तक फाड़ दी।

सूत्रों का दावा है कि मारपीट करने वालों में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का बेटा भी शामिल था, जिसे सिपाही की टोका-टोकी सबसे नागवार गुजरी। युवक ने तुरंत अपने पिता को सूचना दी।

थाने पहुंचे ‘साहब’ और ‘मेमसाहब’:

सूचना मिलते ही हजरतगंज पुलिस मौके पर पहुंची और सिपाही को बचाया। चारों आरोपियों को थाने लाया गया। कुछ ही देर में संबंधित अधिकारी अपनी पत्नी के साथ थाने पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि अधिकारी की पत्नी ने थाने में हंगामा किया और नाइट ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को फटकार लगाई। बाद में अधिकारी अपने बेटे और इनोवा गाड़ी को लेकर चुपचाप रवाना हो गए।

FIR में तीन नामजद, एक अब भी 'अज्ञात':

सिपाही की तहरीर पर दर्ज FIR में तीन युवकों, जयप्रकाश सिंह, अभिषेक चौधरी और सुमित कुमार को नामजद किया गया है, जबकि चौथे हमलावर को 'अज्ञात' बताया गया है। अजीब बात यह है कि दो सप्ताह बीतने के बावजूद राजधानी पुलिस उस 'अज्ञात' की पहचान नहीं कर सकी है।

आरोपी थे नशे में, फिर भी थाने से ही जमानत:

सिपाही के अनुसार, चारों युवक नशे की हालत में थे। बावजूद इसके, तीनों नामजद आरोपियों को पुलिस ने थाने से ही निजी मुचलके पर रिहा कर दिया।

पुलिस पर उठ रहे हैं सवाल:

मामले को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

  • CCTV फुटेज: स्टेडियम चौकी, आसपास और हजरतगंज थाने के CCTV की जांच क्यों नहीं की गई?

  • गाड़ी की पहचान: जिस इनोवा में चारों युवक सवार थे, उसकी जानकारी अब तक क्यों नहीं जुटाई जा सकी?

  • सर्विलांस जांच: तीन नामजद आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल माध्यमों से चौथे की पहचान क्यों नहीं हो सकी?

पुलिस का जवाब:

इस मामले में DCP मध्य आशीष कुमार श्रीवास्तव का कहना है, “तीन आरोपियों को निजी मुचलके पर छोड़ा गया था। चौथे युवक की पहचान की जा रही है। मामले की जांच जारी है।”

टिप्पणियां


Join our mailing list

bottom of page