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‘कांशीराम जयंती पर PDA दिवस नाटकबाजी’: मायावती का सपा पर तीखा वार

  • लेखक की तस्वीर: ब्यूरो
    ब्यूरो
  • 3 दिन पहले
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बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री Mayawati ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सपा का “चाल, चरित्र और चेहरा” दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग और बसपा विरोधी रहा है। बसपा संस्थापक Kanshi Ram की जयंती पर सपा द्वारा ‘पीडीए दिवस’ मनाए जाने को उन्होंने “राजनीतिक नाटकबाजी” करार दिया।


मायावती ने बयान जारी कर कहा कि सपा का बदला हुआ व्यवहार केवल उपेक्षित वर्गों के वोटों के स्वार्थ से प्रेरित है। उनके मुताबिक, बहुजन समाज के संतों, गुरुओं और महापुरुषों के सम्मान के सवाल पर सपा का इतिहास भरोसेमंद नहीं रहा है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।


1993 गठबंधन और गेस्ट हाउस कांड का जिक्र

उन्होंने वर्ष 1993 में सपा-बसपा गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोकने की शर्तों के बावजूद तत्कालीन मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav का रवैया नहीं बदला। इसी के चलते 1 जून 1995 को बसपा ने समर्थन वापस लिया।अगले दिन लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में अपने ऊपर हुए हमले को उन्होंने “सरकारी रिकॉर्ड और इतिहास में दर्ज काली घटना” बताया।


कांशीराम नगर और नाम बदलने पर सवाल

मायावती ने आरोप लगाया कि बसपा सरकार में कासगंज को जिला बनाकर ‘कांशीराम नगर’ नाम दिया गया था, लेकिन Akhilesh Yadav की सरकार बनते ही इसका नाम बदल दिया गया। उन्होंने इसे बहुजन समाज के साथ विश्वासघात बताया।उन्होंने यह भी कहा कि कांशीराम के नाम पर स्थापित उर्दू-फारसी-अरबी विश्वविद्यालय और सहारनपुर के सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार में बदला गया।


दंगों और सांप्रदायिक राजनीति का आरोप

बसपा प्रमुख ने सपा पर सांप्रदायिक दंगों के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा और भाजपा दोनों ने जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति की, जिससे मुस्लिम और बहुजन समाज प्रभावित हुआ।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सपा ने कांशीराम को जीवित रहते सम्मान नहीं दिया और उनके निधन पर राजकीय शोक तक घोषित नहीं किया।

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