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उत्तराखंड कांग्रेस में ‘फेस’ की लड़ाई तेज, गुटबाजी से कमजोर पड़ता संगठन; 2027 की राह मुश्किल

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    ब्यूरो
  • 4 घंटे पहले
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उत्तराखंड की राजनीति में कांग्रेस का जमीनी आधार लगातार कमजोर होता नजर आ रहा है, जबकि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है। दिग्गज नेताओं के बीच “चेहरा कौन” की लड़ाई खुलकर सामने आ रही है और हर नेता खुद को 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सबसे मजबूत दावेदार साबित करने में जुटा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक ढांचा कमजोर होने और कैडर आधारित संरचना न रहने की वजह से पार्टी में अनुशासनहीनता और गुटबाजी बढ़ी है।


पार्टी को 2017 के बाद हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद 2027 में सत्ता में वापसी के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि चुनावी साल की शुरुआत में ही जिस तरह से नेताओं के बीच बयानबाजी और अंदरूनी टकराव सामने आ रहा है, उससे इन दावों की राह कठिन दिख रही है। पार्टी हाईकमान भले ही अंतिम फैसला करेगा कि चुनाव किस चेहरे पर लड़ा जाएगा, लेकिन राज्य स्तर पर नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा अभी से तेज हो गई है।


प्रदेश नेतृत्व में गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत और करण माहरा जैसे नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं हरीश रावत पहले ही इन नेताओं को “पंचमुखी नेतृत्व” बता चुके हैं और खुद चुनाव न लड़ने की बात कहकर नेतृत्व विवाद को शांत करने की कोशिश करते रहे हैं।


इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि पार्टी के भीतर आपसी खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है, जिससे संगठन की पकड़ कमजोर पड़ रही है और आगामी चुनावों में चुनौती और बढ़ती जा रही है।

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