एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती घोटाले की जांच शुरू, रिकवरी और सत्यापन बनी चुनौती
- संवाददाता

- 9 सित॰ 2025
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उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2016 की एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती में हुए भ्रष्टाचार की जांच अब तेज हो गई है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन फर्जी नियुक्त टेक्नीशियन से वेतन की रिकवरी करना है, जिन्होंने अब तक करोड़ों रुपये वेतन के रूप में ले लिया और अब फरार हो गए हैं। बताया जा रहा है कि छह फर्जी टेक्नीशियन ने अब तक करीब साढ़े पाँच करोड़ रुपये वेतन के रूप में प्राप्त किए हैं। इनकी नियुक्ति फर्जी आधार और कागज़ात के जरिए की गई थी।
महानिदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिया है कि 2016 में चयनित 403 टेक्नीशियनों का पुनः सत्यापन कराया जाए। वहीं, ‘अंकुर’ और ‘अंकित’ नाम से किए गए फर्जीवाड़े की भी जांच शुरू हो गई है। एक ही नाम से कई जिलों में टेक्नीशियन नौकरी कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, मैनपुरी और मुजफ्फरनगर में एक ही नाम ‘अंकुर’ से अलग-अलग व्यक्ति कार्यरत हैं, जबकि ‘अंकित’ नाम से पाँच लोग कार्यरत पाए गए। इनमें से कुछ हरदोई, लखीमपुर और गोंडा में नौकरी कर रहे हैं, जबकि बदायूं, आजमगढ़ और ललितपुर में पद छोड़ चुके हैं।
जांच टीम ने संबंधित जिलों के सीएमओ से रिपोर्ट मांगी है। सोमवार को लखीमपुर खीरी और गोंडा में कार्यरत टेक्नीशियन अचानक ड्यूटी से गायब हो गए। विभाग की ओर से इनके खिलाफ मंगलवार को कार्रवाई किए जाने की संभावना है।
इस मामले पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा— “नाम एक, नियुक्तियां अनेक! क्या अब नियुक्तियों का काम भी जुगाड़ आयोग करने लगा है?” उनके पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।





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