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उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: हर आरोपी की उम्र की जांच होगी अनिवार्य

  • लेखक की तस्वीर: ब्यूरो
    ब्यूरो
  • 31 अग॰
  • 1 मिनट पठन

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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय देते हुए कहा है कि यदि किसी आरोपी की उम्र को लेकर संदेह हो, तो मजिस्ट्रेट या संबंधित न्यायालय की पहली जिम्मेदारी होगी कि उसकी उम्र की पुष्टि की जाए। यह आदेश हरिद्वार के एक हत्या मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें आरोपी वारदात के समय नाबालिग पाया गया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त की उम्र घटना के समय 14 वर्ष 7 माह 8 दिन थी, इसलिए उसे किशोर माना जाएगा और अब उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड के पास भेजा जाएगा। इस तरह आरोपी को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का लाभ मिलेगा।

उम्र तय करने का तरीका

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने निर्देश दिए कि आगे से किसी भी मामले में आरोपी की उम्र पर शंका होने पर जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल प्रवेश रजिस्टर को प्राथमिक आधार माना जाएगा। यदि ये दस्तावेज उपलब्ध न हों तो चिकित्सकीय परीक्षण से उम्र की पुष्टि की जाएगी।

सजा पर रोक और जमानत यथावत

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को पहले से मिली जमानत और उसकी सजा पर लगी रोक जारी रहेगी। निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड किशोर न्याय बोर्ड को सौंपने का आदेश भी दिया गया, ताकि वहां से मामले का नया निस्तारण हो सके।

सभी निचली अदालतों को भेजा जाएगा आदेश

महापंजीयक (रजिस्ट्री) को निर्देश दिए गए हैं कि यह आदेश प्रदेश की सभी ट्रायल कोर्ट, मजिस्ट्रेट, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायालय और विशेष अदालतों तक पहुंचाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी को प्रथम बार रिमांड पर लेते समय उसकी उम्र की पुष्टि अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।

 
 
 

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