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अखिलेश यादव से मिले आजम खां, बोले: 50 साल की सियासत के बावजूद लखनऊ में मेरी कोई कोठी नहीं

  • लेखक की तस्वीर: ब्यूरो
    ब्यूरो
  • 7 नव॰
  • 2 मिनट पठन

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे, जहाँ उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी मौजूद रहे। अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर दोनों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा —

“न जाने कितनी यादें संग ले आए, जब वो आज हमारे घर पर आए!ये जो मेल-मिलाप है, यही हमारी साझा विरासत है।”

आजम खां का दर्द – “भूमाफिया कहा गया, पर लखनऊ में कोठी तक नहीं”

आजम खां ने कहा कि “पचास साल की सियासत के बावजूद लखनऊ में मेरी कोई कोठी नहीं है, फिर भी मुझे भूमाफिया घोषित किया गया।”उन्होंने तंज भरे अंदाज़ में कहा, “अगर मैं भूमाफिया होता, तो मेरे पास भी कोठी होती। रामपुर में जहां रहता हूं, वहाँ बारिश में घर में पानी भर जाता है।”

“कट्टा बेचने वाले का बेटा विधायक और उसे कमांडो मिले”

प्रधानमंत्री के हालिया ‘कट्टा’ बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आजम खां ने कहा —

“हमारे यहां तो कट्टे बेचने वाले का बेटा विधायक बन गया और उसे केंद्र सरकार के गार्ड मिले हैं। 1975 में जो कट्टे के ड्रम के साथ गिरफ्तार हुआ, वो खुद विधायक बना और आज उसका बेटा भी विधायक है।”

गुप्त यात्रा और कई नेताओं से मुलाकात

आजम खां का लखनऊ दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया था। वह एक निजी होटल में ठहरे और वहीं सपा नेताओं का आना-जाना शुरू हुआ।उनसे मिलने वालों में पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा और मुख्तार अंसारी के भाई, पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी शामिल रहे।इसके अलावा आजम खां ने हैदर अब्बास की पुस्तक ‘सीतापुर की जेल डायरी’ का विमोचन भी किया।

“बिहार में जंगलराज है, इसलिए प्रचार करने नहीं गया”

पत्रकारों से बातचीत में आजम खां ने कहा कि “उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था ठीक है, लेकिन बिहार में आज भी जंगलराज कायम है।”उन्होंने कहा कि वहाँ केवल वे ही लोग प्रचार करने गए जिनके पास “जानवरों से लड़ने और हथियारों से बचने की ताकत थी।”उन्होंने व्यंग्य में कहा कि उनके पास न सुरक्षा है, न संसाधन — इसलिए वह “उस जंगल तक नहीं गए।”

“जम्हूरियत में ऐसे शब्दों की जगह नहीं”

आजम खां ने कहा कि किसी राज्य को ‘जंगल’ कहना लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है।

“हम किसी राज्य को जंगल कहें, यह उसकी तौहीन है। ऐसे शब्दों के लिए जम्हूरियत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।”

 
 
 

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